Friday, October 30, 2009

भारतीय गणतंत्र के पूर्वराष्ट्रपति स्व.डॉ. जाकिर हुसैन की मनोरंजक और शिक्षाप्रद कहानियां

पहली किताब है - अब्बू खाँ की बकरी मूल्य है- ५०रुपये इसमें संग्रहीत हैं - कुल सात कहानियाँ। दूसरी किताब है- उसी से ठंडा उसी से गरम इसमें संग्रहीत हैं- कुल आठ कहानियां कीमत है- ३०रुपये। परिवार के बच्चों के लिए यह सुंदर भेंट है। बच्चे अच्छी पुस्तकों से दूर न हों, यह हमारी-आपकी सामाजिक-सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।

Monday, October 26, 2009

हिरोशिमा की कवितायें - जापानी कवि तोगे संकिची की कवितायें

6 अगस्त १९४५ की सुबह मैं हिरोशिमा के अपने घर छोड़कर शहर की ओर जाने ही वाला था कि परमाणु बम गिर गया। अणुविस्फोट की जगह मेरे मकान से कुछ ३००० मीटर की दूरी पर थी। मैं कांच के टुकडों के कारण जख्मी हुआ और रेडियेशन से होने वाली बीमारी के साथ जिंदा रहा।....


आप सभी जानते हैं कि अणुबमों से हिरोशिमा में ३००००० और नागासाकी में १५०००० लोगों की ह्त्या हुई। इस संख्या से एक आम कल्पना मिल सकती है। सम्बंधित हर एक व्यक्ति को अत्यंत शोक में दबा देने वाली इस घटना की सघनता से हमारी संवेदनाएं सुन्न हो जाती हैं। हम लोग जो इस त्रासदी के साक्षी थे, इतनी भयंकर तबाही होगी, इसकी कल्पना भी नही कर सकते थे। यह विनाश कल्पनातीत था। ............................


हिरोशिमा का कवि होते हुए भी यह कविता संग्रह पूरा करने में लगे ६ सालों में मैनें जो सुस्ती दिखाई, उसके लिए मैं शर्मिन्दा हूँ। अपनी प्रतिभा की कमी पर भी शर्मिन्दा हूँ। मैं इस घटना की यादों की अर्थहीन टिप्पणी करना नहीं चाहता था, बल्कि मूल भावनाओं को व्यक्त करना तथा लोगों के, मातृ-भूमि के, मानवता के सन्दर्भ में बदलने वाले इतिहास के परिप्रेक्ष्य में इन पीड़ित लोगों की वेदना के महत्व को रेखांकित करना चाहता था। मेरी नज़रों में मेरी यह अभिव्यक्ति पर्याप्त नही है। .......... (उपरोक्त पुस्तक का एक संग्रह )

.........संग्रह से साभार एक कविता ...........

हमारे पिता लौटा दो, हमारी माताएं लौटा दो,
हमारे बुज़ुर्ग लौटा दो, हमारे बच्चे लौटा दो।
हमारे अपने लौटा दो, मुझे ही मुझको लौटा दो।
जब तक इंसान, इंसान बन कर जी रहा है,
तब तक ही उन्हें
न खत्म हो सके, ऐसी शांति लौटा दो।

किताब की कीमत 75 रुपये है।

Friday, October 23, 2009

यह एक रहस्यमय व्यक्ति की गाथा है, एक तूफानी महाकथा का प्रमुख पात्र -जिसे दुनिया का सबसे निर्मम आतंकवादी नेता भी कहा जाता था.

श्रीलंका के एक राष्ट्र-प्रमुख की ह्त्या, पड़ोसी भारत के एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री की हत्या, एक दूसरे श्रीलंकाई राष्ट्रपति की ह्त्या का प्रयास, दर्ज़नों राजनीतिक हत्याएं और आत्मघाती हमले, और हजारों की संख्या में नागरिकों और सैनिकों का नरसंहार -ये मानवीय क्षति उसकी छवि को दानवी सम्मोहन प्रदान करते हैं।
...............ओसामा बिन लादेन के आतंकवादियों द्वारा न्यूयार्क के ट्विन-टावर को उडाये जाने के बहुत पहले, प्रभाकरण श्रीलंका में वैसा ही, और लगभग उतना ही सांकेतिक हमला कर चुका था और कोलम्बो के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को ध्वस्त कर चुका था।
लेकिन इस सऊदी धर्मोन्मादी की तरह प्रभाकरण एक धनाढ्य परिवार में नहीं जन्मा था , न ही उसने अपने इन कृत्यों के लिए किसी दूसरे देश की धरती का सहारा लिया था। वह उसकी तरह धर्मोन्मादी भी नहीं था। अगर उसका कोई उन्माद था तो वह तमिल राष्ट्रवाद था।
................प्रभाकरण के साथ मेरी पहली और एकमात्र भेंट १९८५ की गर्मियों में हुई। इसे एक दूसरे तमिल संगठन से जुड़े व्यक्ति ने आयोजित किया था। प्रभाकरण दिल्ली के डिप्लोमैट होटल में रुका था। उन दिनों श्रीलंका के कई दूसरे उग्रवादी और राजनीतिज्ञ भी राजधानी में थे।
..............उससे विदा लेने से पहले मैंने पूछा कि क्या लिट्टे अपनी किसी कश्ती से मुझे उत्तरी श्रीलंका ले जा सकता है? वह कुछ देर तक मेरे प्रश्न पर गौर करता रहा और फ़िर बोला कि मेरे अनुरोध पर विचार किया जा सकता है।
....................जून १९९० में श्री लंका के ख़िलाफ़ लिट्टे के सैनिक-अभियान के दौरान मैं उत्तरी श्रीलंका का दौरा करने वाले सबसे पहले पत्रकारों में से एक था। तभी मुझे लिट्टे के हाथ में आए विशाल क्षेत्रों का एहसास हुआ था। पूरा क्षेत्र लिट्टे के कैडरों से भरा था। वे बहुत निश्चिंत और आश्वस्त दिखाई दे रहे थे। जब मैंने एक युवा गुरिल्ला से पूछा कि उसके हाथ में कौन सा हथियार है तो उसने पलट कर जवाब दिया, कि तुम क्यों जानना चाहते हो?
.............तो यह है लिट्टे। ....अगर नेता मरने का आदेश देता है तो उन्हें मरना है- यह पूछे बगैर कि क्यों? प्रश्न पूछने वालों के लिए लिट्टे में कोई जगह नही थी। उनका काम सिर्फ़ लड़ना और मरना था। इससे कोई फर्क नहीं पङता कि नेता का क्या आदेश है,वह हमेशा सही होता है,वह भगवान है।
यह उसी आदमी की कहानी है।
किताब का नाम है- एक अबूझ मस्तिष्क के भीतर और लेखक हैं- एम्.आर.नारायण स्वामी -हिन्दी अनुवाद -युगांक धीर
पेपरबैक एडिशन का मूल्य १५० रुपये है।

मन्नू भंडारी की आत्मकथा ......एक कहानी यह भी

आज तक मैं दूसरों की जिंदगी पर आधारित कहानियाँ ही रचती आई थी , पर इस बार मैंने अपनी कहानी लिखने की जुर्रत की है। .........पर अपनी कहानी लिखते समय सबसे पहले तो मुझे अपनी कल्पना के पर ही क़तर कर एक ओर सरका देने पड़े, क्योंकि यहाँ तो निमित्त भी मैं ही थी और लक्ष्य भी मैं ही। ..............पर अपनी कहानी लिखते समय तो मुझे अपने को अपने से ही काटकर बिल्कुल अलग कर देना पड़ा। ...............अब इसमें कहाँ तक सफल हो सकी हूँ , इसके निर्णायक तो पाठक ही होंगे ...मुझे तो न इसका दावा है,न दर्प। ............बाद में तो मैं भी सोचने लगी कि मेरा और राजेंद्र का सम्बन्ध जितना निजता और अंतरंगता के दायरे में आता है, उससे कहीं अधिक लेखन के दायरे में आता है। लेखन के कारण ही हमने विवाह किया था ......हम पति-पत्नी बने थे। उससमय मुझे लगता था कि राजेंद्र से विवाह करते ही लेखन के लिए तो जैसे राजमार्ग खुल जायेगा और उस समय यही मेरा एकमात्र काम्य था। उससमय कैसे मैं यह भूल गई कि शादी करते ही मेरे व्यक्तित्व के दो हिस्से हो जायेंगे .....लेखक और पत्नी। ..................लेकिन मेरे व्यक्तित्व का पत्नी-रूप ? इस पर राजेंद्र निरंतर जो प्रहार करते रहे, उसका परिणाम तो मेरे लेखक ने ही भोगा। (पुस्तक के स्पष्टीकरण अध्याय से मन्नू भंडारी के शब्द)
इस किताब के पेपरबैक एडिशन का मूल्य ११० रूपये है। पहला संस्करण २००८ में प्रकाशित हुआ था,दूसरा २००९ में। पाठकों से इस किताब पर राय अपेक्षित है।

Wednesday, October 14, 2009

जिन्ना, जसवंत और विभाजन

नापसंद पार्टी अध्यक्ष को बदलने या किसी वरिष्ठ सदस्य को हटाने या विवादास्पद पुस्तकों पर ज्ञानप्रद बहसों की स्वस्थ परम्पराएं हिन्दुस्तान की बड़ी राजनैतिक पार्टियों ने अब तक विकसित नहीं की हैं। इसलिए विवाद उठने पर रामराज्य के धोबी की परम्परा पर चलते हुए कानाफूसी स्तर की खबरें मीडिया में लीक कर दी जाती हैं। लेकिन चूंकि प्राय: पार्टी अध्यक्ष मर्यादा पुरुषोत्तम या विदेह जनक नहीं होते और असहमति के पक्ष में सकारात्मक और लोकतांत्रिक दबाव बन पाना पार्टी की परम्पराएं लगभग असंभव बना देती हैं, इसीलिये भाजपा में अंतत: मतभिन्नता की सज़ा दल से निष्कासन है और पुस्तक का प्रतिबंधित किया जाना या बजरंगियों द्वारा जलाया जाना ही आम है। (मृणाल पाण्डे)
जसवंत सिंह की ताज़ा किताब "जिन्ना - भारत-विभाजन के आईने में" और स्वयं लेखक दोनों का हश्र भी इसका प्रमाण है। किताब की कीमत ५९५ रुपये है।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के प्रेरक विचार

बच्चों को प्रेरित कीजिये कि वे अपने सपने संजोना सीखें
सपने देखना , उन्हें दृढ़ संकल्प से सार्थक करना आपका जीवन-दर्शन होना चाहिए
सितारों को न छू पाना लज्जा की बात नहीं, लज्जा की बात है - मन में सितारों को छूने का हौसला ही न होना
बच्चों के मुँह पर मुस्कान सदैव बनी रहे, हमें ऐसी शिक्षा-प्रणाली लानी होगी
एक अच्छी पुस्तक आपके जीवन को उज्जवल करती है
प्रतिदिन एक घंटा पुस्तकें पढ़ने में लगाइए और आप ज्ञान का भण्डार बन जायेंगे
...........उपरोक्त विचार डॉ अब्दुल कलाम की किताब "प्रेरणाप्रद विचार" से संकलित है। मूल्य ९५ रू.है।

Wednesday, October 07, 2009

१८५७ के स्वाधीनता संग्राम का एकमात्र आंखों देखा रोमांचक विवरण

"आँखों देखा ग़दर" माझा प्रवास-विष्णु भट्ट गोडसे का हिन्दी रूपांतरण है। उत्तर भारत की यात्रा पर निकले और अनजाने ग़दर की हलचलों में फंस गए एक मराठा ब्राम्हण की दास्ताँ - जिसे प्रसिद्द हिन्दी कथाकार अमृतलाल नागर ने प्रस्तुत किया है। पेपरबैक संस्करण का मूल्य रू.६५ है।

उन आत्माओं के नाम जो रोशनी की तलाश में कब्रिस्तान के अंधेरे में आज भी संघर्षरत हैं

नासिरा शर्मा के उपन्यास "बहिश्ते ज़हरा" जिसके पेपरबैक संस्करण का मूल्य रू.१५० है , ईरानी क्रान्ति पर लिखा विश्व का पहला उपन्यास है। ज़बान और बयान की आज़ादी के लिए संघर्षरत बुद्धिजीवियों का दर्दनाक अफसाना ......इतिहास के पन्नों पर दर्ज उनकी कुर्बानी व नाकाम तमन्नाओं का एक खूनी मर्सियाह ............संघर्ष अभी जारी है। इस उपन्यास के सारे प्रमुख चरित्र औरतें हैं।

१८५७ के जासूसों का कच्चा चिट्ठा

किताब का नाम है - जासूसों के खुतूत और दिल्ली हार गई - संपादक हैं -शम्सुल इस्लाम। इतिहासकारों का यह मानना है कि १८५७ के स्वतन्त्रता संग्राम से सम्बन्धित ऐसा संग्रह कहीं और एक जगह उपलब्ध नहीं है। पेपरबैक संस्करण का मूल्य रू.१०० है।

प्रेम की चौथी सौगात

नया ज्ञानोदय का प्रेम महाविशेषांक - ४ अंक अब उपलब्ध है। इस अंक का मूल्य ३५ रुपये है।
पृष्ठ संख्या १५२ है। कुल १९ प्रेम कहानियां ....... प्रेमकविताएं........ख़ास आकर्षण - खाड़ी तथा अन्य मुस्लिम देशों से कुछ प्रेम कवितायें।

Sunday, October 04, 2009

बराक ओबामा की दो किताबें अब हिन्दी में

१- नई राहें नए इरादे - रु.३००
२- आशा का सवेरा - रु.३००

Saturday, October 03, 2009

रेणु का उपन्यास

दीर्घतपा - रु २००

एक ओर जहाँ यह उपन्यास वीमेंस वेलफेयर की आड़ में महिलाओं के यौन उत्पीडन को उजागर करता है , वहीं दूसरी ओर सरकारी वस्तुओं की लूट-खसोट पर से परदा उठाता है।

Friday, October 02, 2009

हिन्दी किताब

यदि आप हिन्दी किताबों के बारे में कोई भी जानकारी चाहते हैं तो समय-समय पर इस ब्लॉग पर आते रहिए।
हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि आपकी पठन-रूचि में हम भरपूर मदद कर सकें ।