Wednesday, October 07, 2009

उन आत्माओं के नाम जो रोशनी की तलाश में कब्रिस्तान के अंधेरे में आज भी संघर्षरत हैं

नासिरा शर्मा के उपन्यास "बहिश्ते ज़हरा" जिसके पेपरबैक संस्करण का मूल्य रू.१५० है , ईरानी क्रान्ति पर लिखा विश्व का पहला उपन्यास है। ज़बान और बयान की आज़ादी के लिए संघर्षरत बुद्धिजीवियों का दर्दनाक अफसाना ......इतिहास के पन्नों पर दर्ज उनकी कुर्बानी व नाकाम तमन्नाओं का एक खूनी मर्सियाह ............संघर्ष अभी जारी है। इस उपन्यास के सारे प्रमुख चरित्र औरतें हैं।

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