इस अंक पर कुछ कहा जाय, इसके पहले पाठकों को यह बता देना जरूरी है कि अब तक प्रेम महाविशेषांक-1 के पांच संस्करण, प्रेम महाविशेषांक-2 के तीन संस्करण, प्रेम महाविशेषांक-3 के दो संस्करण निकल चुके हैं। पाठकों का रोना रोने वाले प्रकाशकों-संपादकों-लेखकों से निवेदन है कि वे इस बात पर गौर करें कि हमसे कहाँ चूक हो रही है? यह महज प्रेम का मसला नही है बल्कि सामग्री की पठनीयता का प्रश्न है।
प्रेम महाविशेषांक का 5 वाँ अंक प्रेम के लोकपक्ष पर केन्द्रित है। इस अंक के महत्वपूर्ण आकर्षण हैं- लैला मजनूँ, हीर-राँझा, शीरीं फरहाद, सोहनी महींवाल, सस्सी पुन्न, फूलझरी रानी, चम्पा रानी, सारंगा सदावृक्ष, छैला सन्दु जैसी लोककथाओं का आज के युवा लेखकों द्वारा पुनर्लेखन। इसके अलावा लोकरंग में रंगी चार प्रेमकथाएँ- विजयदान देथा का अनदेखा अंतस(जसमा ओडन), ममता कालिया का निर्मोही, पंकज सुबीर का महुआ घटवारिन तथा रांगेय राघव का नल दमयंती। अन्य महत्वपूर्ण सामग्री हैं- सुशील कुमार फुल्ल का लेख:क्या प्रेमकथाएँ प्रकारांतर से कामकथाएँ ही हैं? / अनुज की पंजाब की प्रेमकहानियाँ / वीर भारत तलवार की आदिवासी समाज में प्रेम / परदेशीराम वर्मा की लोरिक चन्दा और अन्य प्रेम कथाएँ / भारती राणे का प्रणयसिक्त मांडू दुर्ग – बाज बहादुर और रूपमती / देवव्रत जोशी का फकीर का हुस्न, सिन्दूर की शुरुआत / शरद पगारे का औरंगजेब की प्रेमिका / अरविन्द मिश्र का लोकगीतों में पति-पत्नी /ज्ञान चतुर्वेदी का पहला-पहला प्यार............और भी बहुत कुछ।
मित्रों! निवेदन है कि यह अंक अवश्य पढ़ें। अंक मिलने में कोई दिक्कत हो तो हमें hindikitab@gmail.com पर लिखें या फोन नं. 09324618055 पर कहें।
इस अंक की कीमत 30 रुपये है।
Sunday, November 08, 2009
नया ज्ञानोदय-प्रेम महाविशेषांक-5
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment